तेज़ी से बदलते मेरे हालात खरगोश से...
वक्त वहीं रहा मेरा कछुआ सा..!!
घर का सन्नाटा अक्सर पूछता है..
जो अपने होते हैं वो अपने क्यों नहीं होते..
ये टूटे दरवाजे , टूटी चारपाई और टूटी छत...
मालूम होता है किसी 'ईमानदार' का घर है...!!
झगड़े भी बच्चों की तरह होते हैं
पालते रहे तो बड़े हो जाते हैं !!!
अकेले करना पड़ता हैं सफ़र जहां में कामयाबी के लिए..
काफिला, दोस्त और दुश्मन अक्सर कामयाबी के बाद ही बनते हैं...!!!
आदमी परख़ने की एक ये भी निशानी है,
गुफ्तगू बता देती है कौन ख़ानदानी है...
बस इन्सान ही है जो किसी से मिलता जुलता नहीं...
वरना ज़माना तो मिलावट का चल रहा है..!!!!
फिर उड़ गयी नींद;ये सोचकर... सरहद पर जो बहा
खून वो मेरी नींद के लिए था..!!
कौन देता है उम्र भर का सहारा लोग तो जनाजे में भी कंधे बदलते रहते हैं
"नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से ही चलना ज़रा !
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।"
वक्त वहीं रहा मेरा कछुआ सा..!!
घर का सन्नाटा अक्सर पूछता है..
जो अपने होते हैं वो अपने क्यों नहीं होते..
ये टूटे दरवाजे , टूटी चारपाई और टूटी छत...
मालूम होता है किसी 'ईमानदार' का घर है...!!
झगड़े भी बच्चों की तरह होते हैं
पालते रहे तो बड़े हो जाते हैं !!!
अकेले करना पड़ता हैं सफ़र जहां में कामयाबी के लिए..
काफिला, दोस्त और दुश्मन अक्सर कामयाबी के बाद ही बनते हैं...!!!
आदमी परख़ने की एक ये भी निशानी है,
गुफ्तगू बता देती है कौन ख़ानदानी है...
बस इन्सान ही है जो किसी से मिलता जुलता नहीं...
वरना ज़माना तो मिलावट का चल रहा है..!!!!
फिर उड़ गयी नींद;ये सोचकर... सरहद पर जो बहा
खून वो मेरी नींद के लिए था..!!
कौन देता है उम्र भर का सहारा लोग तो जनाजे में भी कंधे बदलते रहते हैं
"नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से ही चलना ज़रा !
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।"
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