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Tera saath hai

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है
अंधेरो से भी मिल रही रोशनी है
कुछ भी नहीं है तो कोई गम नहीं है
हर एक बेबसी बन गयी चांदनी है

टूटी है कश्ती, तेज है धारा
कभी ना कभी तो मिलेगा किनारा
बही जा रही ये समय की नदी है
इसे पार करने की आशा जगी है

हर इक मुश्किल सरल लग रही है
मुझे झोपडी भी महल लग रही है
इन आँखों में माना नमी ही नमी है
मगर इस नमी पर ही दुनिया थमी है

मेरे साथ तुम मुस्कुरा के तो देखो
उदासी का बादल हटा के तो देखो
कभी हैं ये आँसू, कभी ये हँसी हैं
मेरे हमसफ़र बस यही जिन्दगी है

Jab koi jawaan sahid hota hai

जब वो युद्ध में घायल हो जाता है तो अपने साथी से बोलता है :

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी माता पूछे तो, जलता दीप बुझा देना! 
इतने पर भी न समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखला देना!
इतने पर भी न समझे तो, राखी तोड़ देखा देना !!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका लेना! 
इतने पर भी न समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरे पापा पूछे तो, हाथो को सहला देना! 
इतने पर भी न समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका तुम सहला देना!
इतने पर भी ना समझे तो, सीने से उसको लगा लेना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना! 
इतने पर भी ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना!!"

Apna gaaon

अपना गाँव, वाह क्या बात है।
.
एक अमीर आदमी अपने बेटे
को लेकर गाँव गया,
.
ये दिखाने कि what is गरीबी
:
:
:
गाँव की गरीबी दिखाने के
बाद बेटे से पूछा
"देखा गरीबी..??"
:
:
:
बेटे ने जवाब दिया : हमारे
पास 1 dog ...........
उनके पास 10- 10 गाये है
.
हमारे पास नहाने का छोटा
सा जगह है
..
उनके पास. तालाब है
.
हमारे पास बिजली है....
उनके पास सितारे...
.
हमारे पास small
piece of land.......
उनके पास बडे बडे खेत......
.
हम खाना डिब्बे का बासी
खाते है....
वो उगा कर और ताजा
तोडकर खाते है.
.
उनके पास अपने सच्चे मित्र
है......
बस कंप्यूटर ही हमारा मित्र
है
.
हमारे पास खुशियाँ खरीदने
को पैसा है......
उनके पास खुशियाँ है पैसे
की जरुरत ही नही
.
उनके पापा के पास बेटे के
लिऐ समय है....
पापा आपके पास समय ......
नही है।
:
:
:
पापा एकदम चुप....
.
बेटे ने कहाँ ''Thanks पापा
for showing me कि हम
कितने गरीब है ।
.
गांव को पसंद करने वाले आगे फारवर्ड करे।
हम भारतीयों की 
बराबरी क्या करेगी
दुनिया
.
.
डालर के भाव के बराबर के 
""प्याज""का तो
हम तड़का लगाते हैं 

Daadi maa banati thi roti

दादी माँ बनाती थी रोटी
पहली गाय की , आखरी कुत्ते की...........
हर सुबह नन्दी आ जाता था
दरवाज़े पर गुड़ की डली के लिए.........
कबूतर का चुग्गा
किडियो(चीटियों) का आटा....
ग्यारस, अमावस, पूर्णिमा का सीधा
डाकौत का तेल
काली कुतिया के ब्याने पर तेल गुड़ का सीरा..........
सब कुछ निकल आता था
उस घर से ,
जिसमें विलासिता के नाम पर एक टेबल पंखा भी न था........
आज सामान से भरे घर में
कुछ भी नहीं निकलता
सिवाय लड़ने की कर्कश आवाजों के.......
....
मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे...
चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे...
सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए....
छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं.....
आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे...
दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था.......
कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे.......
इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था.......
रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे...
पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था...
मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे...
अब शायद कुछ पा लिया है
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया!!!!

Kaun jayeda kimti

कौन ज्यादा कीमती??
एक बहुत छोटी सी बच्ची ने अपनी मम्मी से पूछा –
क्या आप कभी अपना रुपयों से भरा पर्स नौकरानी के पास छोड सकती हैं??
मम्मी ने लिपस्टिक लगाते हुए बोला –पर्स और नौकरानी के पास!!
बिल्कुल नही!! मतलब ही नही!! सवाल ही नही!!
फिर बच्ची ने बहुत मासूमियत से पूछा –
फिर ‘मुझे’ नौकरानी के पास कैसे छोड सकती हो??

Koi bijali inn kharabo mai ghata roshan kare

कोई बिजली इन ख़राबों में घटा रौशन करे;
ऐ अँधेरी बस्तियो! तुमको खुदा रौशन करे;
नन्हें होंठों पर खिलें मासूम लफ़्ज़ों के गुलाब;
और माथे पर कोई हर्फ़-ए-दुआ रौशन करे;
ज़र्द चेहरों पर भी चमके सुर्ख जज़्बों की धनक;
साँवले हाथों को भी रंग-ए-हिना रौशन करे;
एक लड़का शहर की रौनक़ में सब कुछ भूल जाए;
एक बुढ़िया रोज़ चौखट पर दिया रौशन करे;
ख़ैर अगर तुम से न जल पाएँ वफाओं के चिराग;
तुम बुझाना मत जो कोई दूसरा रौशन करे।

Meri beti

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है,
कुछ जिद्दी, कुछ नक् चढ़ी हो गई है, 
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है,
अब अपनी हर बात मनवाने लगी है,
हमको ही अब वो समझाने लगी है,
हर दिन नई नई फरमाइशें होती है,
लगता है कि फरमाइशों की झड़ी हो गई है,
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है, 
अगर डाटता हूँ तो आखें दिखाती है,
खुद ही गुस्सा करके रूठ जाती है, 
उसको मनाना बहुत मुश्किल होता है,
गुस्से में कभी पटाखा कभी फूलझड़ी हो गई है,
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है, 
जब वो हस्ती है तो मन को मोह लेती है,
घर के कोने कोने मे उसकी महक होती है, 
कई बार उसके अजीब से सवाल भी होते हैं,
बस अब तो वो जादू की छड़ी हो गई है,
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है, 
घर आते ही दिल उसी को पुकारता है,
सपने सारे अब उसी के संवारता है, 
दुनियाँ में उसको अलग पहचान दिलानी है,
मेरे कदम से कदम मिलाकर वो खड़ी हो गई है, 
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है !!

बेटियाँ सब के नसीब में कहाँ होती है
रब को जो घर पसंद आए वहाँ होती है .

Magar sirf fark itna hai

सभी इन्सान है मगर फर्क सिर्फ इतना है!
कुछ जख्म देते है,कुछ जख्म भरते है!!
हमसफर सभी है मगर फर्क सिर्फ इतना है!
कुछ साथ चलते है,कुछ छोड जाते है!!
प्यार सभी करते है मगर फर्क सिर्फ इतना है!
कुछ जान देते है, कुछ जान लेते है!!
दोस्ती सभी करते है मगर फर्क सिर्फ इतना है!
कुछ दोस्ती निभाते है,कुछ आजमाते है!!

Tere hath ki kash mai wo lakir ban jaau

तेरे हाथ की काश मैं वो लकीर बन जाऊं,
काश मैं तेरा मुक़द्दर तेरी तक़दीर बन जाऊं,
मैं तुम्हें इतना चाहूँ कि तुम भूल जाओ हर रिश्ता,
सिर्फ मैं ही तुम्हारे हर रिश्ते की तस्वीर बन जाऊं,
तुम आँखें बंद करो तो आऊं मैं ही नज़र,
इस तरह मैं तुम्हारे हर ख्वाब की ताबीर बन जाऊं.

Bichad ke tum se zindagi saja lagti hai

बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है,
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है ।
तड़प उठता हूँ दर्द के मारे,
ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है ।
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ,
मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।

Wah Re Jamane Teri Had Ho Gayi

वाह रे जमाने तेरी हद हो गई, मिसेज के आगे मदर रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला, आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी, तेरे सरताज हो गई !
बीवी हमदर्द और मॉं सरदर्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………
पेट पे सुलाने वाली, पैरों में सो रही !
बीवी के लिए लिम्का, मॉं पानी को रो रही !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………
मॉं मॉजती बर्तन , वो सजती संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू , उसे उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत, मौत तेरी कहॉ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………..
अरे जिसकी कोख में पला, अब उसकी छाया बुरी लगती,
बैठे होण्डा पे महबूबा, कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की, वो मोहब्बतें मॉ की, सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………..
बेबस हुई मॉ अब, दिए टुकड़ो पर पलती है,
अतीत को याद कर, तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई, वो खुद मुसीबत हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ….

Tum hona na khamosh kabhi

तुम होना ना खामोश कभी,
आँखों में नमी ना लाना कभी,
जो भी हो कह देना मुझसे,
मुझसे छुपाना ना कुछ भी कभी,
जब भी होगी उदास तुम कभी,
तुम्हारे गम चुराऊँगा,
फिर भी ना मुस्काई अगर,
तो गुदगुदी खूब मचाऊँगा,
अगर फिर भी हो तेरी आँख में आँसू,
तो गले से तुझे लगाऊँगा,
समेट के तेरे हर जज़्बात,
दिल में तुझे छुपाऊंगा,
कभी ना जाने दूँगा दूर,
कभी ऐसा तुझमे समाऊँगा,
भूल जायेगी हर गम अपने,
इतना तुझे हसाऊंगा |

Makan Chahe Kache The

मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे…
चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे…
सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए…
छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं…
आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे…
दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था…
कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे…
इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था…
रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे…
पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था…
मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे…
अब शायद कुछ पा लिया है,
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया…
जीवन की भाग-दौड़ में –
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी,
आम हो जाती है।
एक सवेरा था,
जब हँस कर उठते थे हम…
और
आज कई बार,
बिना मुस्कुराये ही
शाम हो जाती है!!
कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते…
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते…

Zindagi Ki Daud Mai

जिन्दगी की दौड़ में,
तजुर्बा कच्चा ही रह गया…
हम सिख न पाये ‘फरेब’
और दिल बच्चा ही रह गया !
बचपन में जहां चाहा हंस लेते थे,
जहां चाहा रो लेते थे…
पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए
और आंसुओ को तन्हाई !
हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से…
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में !
चलो मुस्कुराने की वजह ढुंढते हैं…
जिन्दगी तुम हमें ढुंढो…
हम तुम्हे ढुंढते हैं …!!!

Beti Ko Bade Laadd Pyar Se Paala Hai

एक पिता अपनी बेटी की शादी मे दामाद से
माँ की ममता का सागर ये,
मेरी आँखो का तारा है.
कैसे बतलाउ तुमको,
किस लाड प्यार से पाला है
.
तुम द्वारे मेरे आए हो, मैं क्या सेवा कर सकता हूँ
ये कन्या रूपी रत्न तुम्हे, मैं आज समर्पित करता हूँ
.
मेरे हृद्य के नील गगन का ये चाँद सितारा है
मैं अब तक जान ना पाया था, इस पर अधिकार तुम्हारा है
ये आज अमानत लो अपनी, कर बँध निवेदन करता हूँ
ये कन्या रूपी रत्न तुम्हे, मैं आज समर्पित करता हूँ ‘
.
इससे तो भूल होगी, ये सरला है सुकुमारी है .
इसके अपराध माफ़ करना मेरे घर की राजदुलारी है
मेरी कुटिया की शोभा है,जो तुमको अर्पण करता हूँ
ये कन्या रूपी रत्न तुम्हे मैं आज समर्पित करता हूँ ‘
.
भैया से आज बहन बिछ्ड़ी, माँ से बिछ्ड़ी माँ की ममता
बहनो से आज बहन बिछ्ड़ी , लो तुम्ही इसके आज पिता
मैं आज पिता कहलाने का अधीकर समर्पित करता हूँ
ये कन्या रूपी रत्न तुम्हे आज समर्पित करता हूँ ‘ ‘
.
था जिस दिन इसका जन्म हुआ ना गीत हुए ना शहनाई,
पर आज विदा के अवसर मेरे घर बजती शहनाई
ये बात समझकर मैं मन ही मन रोया करता हूँ,
ये कन्या रूपी रत्न तुम्हे आज समर्पित करता हूँ ‘

Haar Maan Lo


जब दुनिया यह कह्ती है कि ‘हार मान लो’,
तो आशा धीरे से कान में कह्ती है कि ‘एक बार फिर प्रयास करो’ और यह ठीक भी है.,
“जिंदगी आईसक्रीम की तरह है,
टेस्ट करो तो भी पिघलती है;
वेस्ट करो तो भी पिघलती है,
इसलिए जिंदगी को टेस्ट करना सीखो,
वेस्ट तो हो ही रही है.
पैसा तो हर कोई
कमा लेता हैं लेकिन
खुशनसीब होते हैं जो
“परिवार” कमा लेते हैं !
अगर कोई आपको
अच्छा लगता हैं तो
अच्छा वो नहीं अच्छे
आप हैं क्योंकि
आपने उसमें अच्छाई
खोजी हैं !
“जोखिम उठाएं”
यदि आप जीत जाते हैं,
तो आप प्रसन्न होंगे,
यदि आप हार जाते हैं,
तो आप समझदार बन जाएंगे !
ज्ञान से हम शब्दों को जानते हैं,
लेकिन अनुभव से हम शब्दों
का अर्थ जानते हैं !

Duao ki aarh mai panah liye huey

दुआओं की आड़ में पनाह लिए हुए,
एक उम्र गुजरी है मेरी आह लिए हुए,
मैं दुनिया खरीदने निकला था एक ज़माने पहले,
मैं लौटा हूँ ज़माने भर के गुनाह लिए हुए |

Matt satao hume hum sataye huey hai

मत सताओ हमें, हम सताए हुए हैं,
अकेले रहने का गम उठाये हुए हैं,
खिलौना समझ के ना खेलो हमसे,
हम भी उसी खुदा के बनाए हुए है।