कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे वो तरस जायेंगे प्यार की एक बून्द के लिए हम तो बादल है प्यार के किसी और पर बरस जायेंगे |
मौसम मे जुदाई के गर तेरा दीदार हो जाये । तो मेरा दिल भी सनम तेरा कर्जदार हो जाये । तुम जो छोङ कर गये हो हमको तन्हां, है बद्दुवा मेरी की तुम को भी प्यार हो जाये ॥
टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी, मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी, न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से, के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी
ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं, तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी, हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं.
खामोशी से बिखरना आ गया है, हमें अब खुद उजड़ना आ गया है, किसी को बेवफा कहते नहीं हम, हमें भी अब बदलना आ गया है, किसी की याद में रोते नहीं हम, हमें चुपचाप जलना आ गया है, गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो, हमें कांटों पे चलना आ गया है|
तुम बताओ तो मुझे किस बात की सजा देते हो। मंदिर में आरती और महफ़िल में शमां कहते हो। मेरी किस्मत में भी क्या है लोगो जरा देख लो, तुम या तो मुझे बुझा देते हो या फिर जला देते हो..