जिसमे याद ना आए वो तन्हाई किस काम की, बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की, बेशक इंसान को ऊंचाई तक जाना है, पर जहाँ से अपने ना दिखें वो उँचाई किस काम की
फिर न सिमटेगी ये मोहब्बत जो बिखर जायेगी, ज़िन्दगी ज़ुल्फ़ नहीं जो खुल के संवर जायेगी, थाम लो हाथ उसका जो प्यार करे तुमसे, ज़िंदगी फिर न मिलेगी जो गुज़र जायेगी...!!!